महात्मा बुद्ध ,बौद्ध धर्म एवं दर्शन (Part-3)


बौद्ध संगीतियाँ 


बौद्ध धर्म के विचारों का प्रचार प्रसार करने के लिए चार बौद्द संगीतियों का आयोजन किया गया था ।

जो हैं -


बौद्ध धर्म का विभाजन 

बौद्ध धर्म का विभाजन कालांतर में हीनयान तथा महायान नामक दो समुदायों में हो गया था

हीनयान संप्रदाय 


बौद्ध धर्म की प्राचीन स्वरूप को महत्व देने वाले संप्रदाय को हीनयान संप्रदाय कहा जाता है 

यह महात्मा बुद्ध को आदि धर्म प्रवर्तक तथा निर्वाण प्राप्त कर सामान्य व्यक्ति मानता है 

हीनयान बुद्ध को ईश्वर का अवतार नहीं मानता अर्थात बुद्ध में दैवीय शक्ति प्रतिष्ठित करने का विरोधी है 

यह कर्म वाद  एवं पुनर्जन्म में विश्वास रखता है तथा बुद्ध के बताए हुए मार्ग का अनुसरण करने की बात करता है


महायान संप्रदाय 

बौद्ध धर्म के जिन अनुयायियों ने कठिन मार्ग को सरल बनाने के लिए कुछ नवीन सरल मान्यताओं को विकास कर उनके अनुसार चलना प्रारंभ किया , वे  महायानी कहलाए 

महायान संप्रदाय की मान्यता है कि बुद्ध के पूर्व भी बौद्ध धर्म के अनेक प्रवर्तक  हो चुके हैं जिन्हें बोधिसत्व कहा जाता था 

महायानियों का मानना है कि व्यक्ति को आत्म कल्याण ही नहीं करना है बल्कि संसार के अन्य दुखी प्राणियों की सेवा के साथ उन्हें निर्वाण मार्ग बताना है 

बुद्ध का जीवन इसी का उदाहरण हैं । 

बौद्ध धर्म का मुख्य साहित्य 

बौद्ध धर्म का साहित्य को सामूहिक रूप से त्रिपिटक कहा जाता है 

त्रिपिटक में सुत्तपिटक, विनयपिटक तथा अभिधम्मपिटक  शामिल है 




इनका विवरण निम्नलिखित है

1. सुत्तपिटक 

सुत्त पिटक का शाब्दिक अर्थ है - धर्मोपदेश 

यह पांच निकाह में विभाजित है- 





दीर्घ निकाय - 

गद्य  एवं पद्य दोनों में रचित इस निकाय में अन्य धर्मों के सिद्धांत का खंडन तथा बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का समर्थन किया गया है 

इसमें महात्मा बुद्ध के जीवन के आखिरी जीवन, अंतिम उपदेश, मृत्यु तथा अंत्येष्टि का वर्णन किया गया है 

महापरिनिब्बानसुत्त  सुत्त का सर्वाधिक महत्वपूर्ण सूत्र है

मंझीम निकाय 

इसमें महात्मा बुद्ध को कहीं साधारण मनुष्य तो कहीं अलौकिक शक्ति वाले देव रूप में वर्णित किया गया है 

संयुक्त निकाय 

गद्य एवं पद्य दोनों शैलियों के प्रयोग वाला यह निकाय अनेक संयुक्तों का संकलन मात्र है 

अंगुत्तर निकाय 

इसमें महात्मा बुद्ध द्वारा भिक्षुओं को उपदेश में कई जाने वाली बातों का वर्णन किया गया है 

इसमें छठी शताब्दी ईसापूर्व के सोलह महाजनपदों का उल्लेख मिलता है 

खुद्दक निकाय 

भाषा, विषय शैली की दृष्टि से सभी नेताओं से अलग,  लघु ग्रंथों से संकलन वाला यह निकाय अपने आप में स्वतंत्र एवं पूर्ण है

2. विनय पटक

इस में बौद्ध मठों में रहने वाले भिक्षु - भिक्षुणीयों  के अनुशासन संबंधी नियम दिए गए हैं 

बौद्ध संघ की कार्य प्रणाली की व्यवस्था भी इसी ग्रंथ में उल्लेखित है 

यह पतिमोक्ख, सुत्त विभंग खंधक तथा परिवार में विभक्त है

3. अभिधम्मपिटक

इसमें महात्मा बुद्ध के उद्देश्य एवं सिद्धांतों तथा बौद्ध मतों  की दार्शनिक व्याख्या की गई है 

एक मान्यता के अनुसार इस पिटक का संकलन अशोक के समय में संपन्न तृतीय बौद्ध संगीति में मोगलीपुत तिस्स ने किया था 

इसके सात अन्य ग्रंथ - धम्म संगणि , विभंग, धातु कथा , पुग्गल पन्नपति , कथा वत्र्थु, यमक और पत्थान हैं , जिनहे सत्तपरकरण कहा जाता है 

त्रिपटकों के अतिरिक्त कुछ अन्य बौद्ध ग्रंथ भी  पालि भाषा में लिखे गए हैं । ये हैं 

मिलिंद पन्हों

इससे ईसा की प्रथम दो शताब्दियों के भारतीय जन जीवन के विषय में जानकारी मिलती है 

इसमें यूनानी शासक मिनांडर एवं बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच वार्तालाप का वर्णन है 

दीपवंश
यह लगभग 4वी शताब्दी में रचित सिंहल द्वीप के इतिहास पर प्रकाश डालने वाला ग्रंथ है 

महावंश 
मदन्त महानाम द्वारा संभवत : 5वी शताब्दी व 6वी शताब्दी में रचित इस ग्रंथ में मगध के राजाओं की क्रमबद्ध सूची मिलती है 

महावस्तु 
यह विनय पटक के संबंधित ग्रंथ है 

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