महात्मा बुद्ध ,बौद्ध धर्म एवं दर्शन (Part-4)

बौद्ध धर्म का प्रसार


भारत में बौद्ध धर्म समय के साथ साथ उठता गिरता रहा 



लेकिन अपने जन्म से बाद से लेकर 6वी शताब्दी ईस्वी तक बौद्ध भिक्षुओं और कुछ भारतीय सम्राटों के प्रयासों से यह धर्म मध्य एशिया, चीन, तिब्बत, जापान, वर्मा, दक्षिण पूर्वी एशिया और जन तक फैल गया था 



Source : Wikipedia

बौद्ध धर्म के विद्रोह में प्रचार कार्य विधिवत रूप से मौर्य साम्राज्य अशोक के समय से आरंभ हुआ 

उसने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए श्रीलंका, वर्मा, मलेशिया और पश्चिमी एशिया  में प्रचारक भेजें 

सम्राट अशोक के शिलालेखों से यह पता चलता है बौद्ध प्रचारकों ने सीरिया, मेसोपोटामिया, तथा यूनान मैसिडोनिया एरच तथा कोविंद आदि में बौद्ध धर्म को प्रचारित किया 

विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रचार में महायान शाखा का महत्वपूर्ण योगदान रहा था 

महायान शाखा के अनुयायी  सम्राट कनिष्क  के प्रयत्नों से मध्य एशिया, तिब्बत,  चीन तथा जापान तक इस धर्म का खूब प्रचार हुआ 

चीन में सम्राट मींगति के समय बौद्ध धर्म का विस्तार हुआ 

इस दौरान कई विद्वान चीन गए तथा उन्होंने चीनी भाषा में बौद्ध धर्म का अनुवाद किया 

कालांतर में बौद्ध धर्म चीन से होता हुआ कोरिया, मंगोलिया, फारमोसा, जापान तक फैला। 

वर्तमान में श्रीलंका, तिब्बत, कंबोडिया, मलेशिया, थाईलैंड आदि देशों में इस धर्म बहुत को मानने वाले विश्वास करते हैं

बौद्ध धर्म का पतन 

बौद्ध धर्म के पतन के लिए निम्नलिखित बिंदुवार कारण जिम्मेवार थे 

  • राजकीय संरक्षण का अभाव 
  • बौद्ध भिक्षुओं का नैतिक पतन 
  • ब्राह्मण धर्म का  पुनुर्त्थान 
  • बौद्ध धर्म में कर्मकांडों का समावेशन
  • बौद्ध धर्म का विभाजन 
  • विदेशी आक्रमण 
  • बुद्ध को विष्णु का अवतार घोषित करना 
  • संघ में महिला का प्रवेश 
  • पालि भाषा को त्याग कर संस्कृत का अपनाना 

बौद्ध संघ 


  • महात्मा बुद्ध ने जिस बौद्ध संघ प्रणाली को जन्म दिया था, वह अपने ढंग की अनूठी प्रणाली थी । 
  • उनके संघों की जीवन प्रणाली जंतंत्रात्मक होने के साथ सघीय भावना को लिए हुए थी 
  • संघों में रहने वाले सभी भिक्षु गण एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर बुद्ध के उपदेशों का प्रचार करते हुए संगठित रूप से त्याग, सदाचार, अध्यवसाय और अध्यक्षता के उत्तम गुणों का परिचय देते थे 
  • साथ ही संघ प्रत्येक प्रकार की समस्याओं तथा  विपत्तियों का सामना करने के लिए तत्पर रहते थे 
  • ऐसी स्थिति में बौद्ध संघों की इस संगठन शक्ति का साम्राज्य जनता पर गहरा प्रभाव पड़ा 
  • इस धर्म के प्रति आम जनमानस का सम्मान बढ़ने लगा 
  • इस प्रकार बौद्ध संघ बौद्ध धर्म प्रसार का एक महत्वपूर्ण कारक सिद्ध हुआ

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